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31 अगस्त अन्याय दिवस के उपलक्ष्य रैली



ज़रा सोचिए आपको कैसा लगेगा यदि आधी रात को बेवजह आपके घर को चारों और से हज़ारों policemen द्वारा घेर लिया जाए और बिना सबूत, summon और रज़ामंदी के आपके 77 वर्षीय पिताजी को गिरफ़्तार कर लिया जाए और पूरी रात एयरपोर्ट पर एक लोहे की कुर्सी पर बिठाकर रखा जाए। 
 
फ़िर उनपर आरोप लगाया जाए एक नाबालिक लड़की के बलात्कार का ! वो भी उस पिता पर जो बचपन से धर्म तथा सत्य के मार्ग पर चलें हैं। जिन्होंने ईश्वर प्राप्ति की लालसा में अपना घर - बार सब त्याग दिया और कड़े अनुष्ठान और तपस्या के उपरांत 22 वर्ष की भरपूर युवावस्था में आत्म-साक्षात्कार कर लिया। 
 
एक बार उस जगह खुद को रखके देखिए और अपनी अंतरात्मा से पूछिए - "क्या आपके पिता ऐसी नीच हरकत कर सकते हैं ? "जवाब स्पष्ट सुनाई देगा - "बिलकुल नहीं "

जी हाँ हम और किसी की नहीं संत आसारामजी बापू की बात कर रहे है । जिनको 1st sep 2013 से जोधपुर सेंट्रल जेल में रखा गया है। कोई ऐसा अत्याचार नहीं है जो उनपर न किया गया हो - TRIGEMINAL NEURALGIA जैसी भयानक बिमारी से पीड़ित होने के बावजुद 5 महीनों तक वो अस असहनीय पीड़ा में तड़पते रहे पर उनकी चिकित्सा की अर्ज़ी तक खारिज़ कर दी गई क्या यह मानव अधिकारों की अवहेलना नहीं है ?

3 साल हो गए अभी तक एक भी ज़ुर्म साबित नहीं हुआ पर मीडिया ने पहले दिन से ही उन्हें ढोंगी बाबा और बलात्कारी का ख़िताब दे दिया - क्या यह मानव अधिकारों की अवहेलना नहीं है ?
भला क्या है उनके कसूर - यही कि
1. ईसाई मिशनरिओं द्वारा धर्मांतरण कार्यों का उन्होंने प्रतिरोध किया
2. सरकार को अमरीका के साथ राम सेतु का सौदा करने के लिए ललकारा
3. करोड़ों साधकों की सिगरेट , तम्बाकू , शराब छुड़ाई जिससे MNCs को लाखों खरबों रुपैयों का नुक़सान हुआ
दरअसल बात यह है कि सत्य को हर युग में अग्नि परीक्षा से गुज़रना ही पड़ता है । पहले असुर ऋषियों की तपस्या तथा सात्विकता भंग करते थे और अब यह भूमिका मीडिया , सरकार और धर्मान्तरण संघठनों की है। 77 वर्षीय संत आसारामजी बापू ने अपने अमूल्य जीवन के 50 वर्ष परोपकार व मानव - उत्थान में व्यतीत कर दिए। ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्मान्तरण कार्यों का प्रतिरोध करने में आसाराम बापूजी सबसे आगे हैं।
सुरेश चव्हानके - चेयरमैन सुदर्शन चैनल -"उनके सत्संग से प्रभावित होकर कितने करोड़ों साधकों ने सिगरेट , गुटका , शराब जैसे व्यसनों को त्याग कर ब्रह्माचार्य का मार्ग अपनाया है।परिणामतः विदेशी कम्पनियों को लाखों खरबों रूपैयों का नुकसान हुआ है। अतः विदेशी चैनेलों और इन कम्पनियों के लिए 1000 करोड़ रुपैये बापूजी के कुप्रचार में लगाना कौन सी बड़ी बात है !”


20 अगस्त 2013 को छिंदवाड़ा गुरुकुल की एक छात्रा ने बापूजी पर छेड़खानी का घिनोना आरोप लगाया। उसका दावा था की बापूजी अपनी कुटिया में जबरन डेढ़ घंटे तक उसके शरीर पर हाथ फेरते रहे। हैरानी की बात है कि उसकी माँ बाहर ही बैठी थी पर उसने अपनी बेटी की चिल्लाने की आवाज़ नहीं सुनी ! घटना बताते हैं जोधपुर में 15.8.2013 की ,लड़की है शाहजहांपुर की और FIR दर्ज़ की गई 5 दिन बाद 20.8.2013 को रात के 2.15 पर नई दिल्ली के कमला नगर पुलिस थाने में !
इससे बड़े अचंभे की बात यह है कि जोधपुर पुलिस DCP लाम्बा के अनुसार " FIR में बलात्कार को कोई जिक्र नहीं है तो फ़िर " रेप , रेप चिल्लाकर मीडिया क्यों लोगों को गुमराह कर रहा है !
डॉ शैलजा के अनुसार " पीड़िता का HYMEN INTACT था और उसके शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं थे जो प्रतिरोध का संकेत देते हैं ! तो फ़िर कैसा rape case ?
3 साल पहले आज के दिन , 31 अगस्त 2013 को परम पूज्य संत शिरोमणि श्री आशारामजी बापूजी को बिना किसी सबूत गिरफ्तार किया गया| सुबह की फ्लाइट होने पर भी रात भर जगाकर प्रताड़ित किया गया|
Trigeminal Nuralgia (इसे suicide disease भी कहते है) जैसी घातक बीमारी होने पर भी इलाज के लिए जमानत नहीं दी गयी| सब जानते है की बापूजी पहले नाचते-कूदते थे, लेकिन अब वे व्हील चेयर पर ही दिखते है| कितना कहर बरस गया अन्याय का निर्दोष संत पर!



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